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Muzaffarnagar: चरथावल के ऐतिहासिक ठाकुरद्वारा मंदिर और भोकरहेड़ी में सिद्धपीठ बाबा गरीबदास मंदिरों के सुंदरीकरण के लिए 174.45 लाख मंजूर

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मुजफ्फरनगर/चरथावल। नगर विकास विभाग से वंदन योजना के तहत चरथावल के ऐतिहासिक ठाकुरद्वारा मंदिर और भोकरहेड़ी में सिद्धपीठ बाबा गरीबदास मंदिर के लिए 174.45 लाख रुपये का बजट मंजूर किया गया है। जिले में दो नगर पंचायतों को यह सौगात मिली है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मंदिरों और मठों के जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण पर जोर है। उन्होंने प्रदेश की नगर पंचायतों और नगरपालिका क्षेत्रों में सांस्कृतिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व के स्थलों के जीर्णोद्धार अन्य सुविधाओं के लिए वंदन योजना शुरू की है। चरथावल में ठाकुरद्वारा मंदिर ऐतिहासिक धरोहर है। नगर पंचायत ने पिछले दिनों मंदिराें के जीर्णोद्धार और सुदंरीकरण के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा था। चेयरमैन इस्लामुद्दीन त्यागी ने बताया कि पहली बार शासन स्तर से मंदिरों के विकास का ख्याल रखा गया है।

ठाकुरद्वारा मंदिर में विश्रामालय, किओक्स, छादक, साइनेज एवं प्रकाश व्यवस्था, बेंच, सुंदरीकरण और इंटरलॉकिंग के लिए 44.88 लाख रुपये का बजट मंजूर करते हुए धन अवमुक्त किया है। ईओ नीलम पांडेय ने बोर्ड बैठक में इसकी जानकारी सदस्यों को दी। वहीं, जिले की नगर पंचायत भोकरहेड़ी में सिद्धपीठ बाबा गरीबदास मंदिर में अवस्थापना सुविधाओं के लिए चरथावल की तरह कार्य कराने के लिए 129.77 लाख रुपये मंजूर कर दिए हैं।

मुगलकालीन ठाकुरद्वारा मंदिर का निराला अतीत

चरथावल। वृंदावन में करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र भगवान राधा-वल्लभ की ननिहाल चरथावल का ठाकुरद्वारा मंदिर है। मान्यता है कि सदियों पूर्व यहां पुजारी रहे पंडित आत्मदेव की भक्ति से प्रसन्न होकर मंदिर के गर्भगृह में श्री राधा-कृष्ण विग्रह यानि मूर्ति स्वयंभू भगवान शंकर ने हृदय से प्रकट कर भेंट की थी।

लोग बताते हैं किसी जमाने में अद्भुत मूर्ति चरथावल क्षेत्र में भक्ति और आस्था का केंद्र रहीं। उन्हें राधा जी ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा था कि हमारा विग्रह रूप, जिसकी सेवा तुम करते हो वह वृंदावन में स्थापित होगा। तुम्हारी दोनों पुत्रियों का विवाह हरिवंश महाप्रभु से होगा। राधा जी की वाणी सत्य हुई। कस्बे के चिकित्सक विशाल कौशिक बताते हैं कि उनके बाबा महावीर प्रसाद बताते थे कि मंदिर के पुजारी आत्मदेव का परिवार कई पीढ़ियों से भगवान शंकर की निष्काम भक्ति में लीन था।

पुजारी ने राधा वल्लभ संप्रदाय के प्रवर्तक हित हरिवंश महाप्रभु का विवाह दोनों कन्याओं से किया। दहेज के रूप में राधा-वल्लभ के अलौकिक विग्रह लेकर वह वृंदावन चले गए थे। वृंदावन में राधा रानी के आदेश पर प्रथम मंदिर स्थापित हुआ। यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय का मुख्य केंद्र है।

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