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रिंकू सिंह ने जहां खाई थी सात गोलियां,वहीं मिली तैनाती

IAS Officer
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जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते रिंकू सिंह राही ने 2009 में 100 करोड़ का छात्रवृति घोटाला उजागर किया था। इसके विरोध में उन्हें सात गोलियां मारी गई थीं। सौभाग्य से वह बच गए। उस हमले को उन्होंने चुनौती की तरह लिया और कड़ी मेहनत कर सिविल सेवा परीक्षा पास की। उन्हें तीन महीने के प्रशिक्षण के लिए मुजफ्फरनगर भेजा जा रहा है।

जिला समाज कल्याण अधिकारी रहते रिंकू सिंह राही ने 2009 में 100 करोड़ का छात्रवृति घोटाला उजागर किया था। इसके विरोध में उन्हें सात गोलियां मारी गई थीं। सौभाग्य से वह बच गए। उस हमले को उन्होंने चुनौती की तरह लिया और कड़ी मेहनत कर सिविल सेवा परीक्षा पास की।

उन्हें तीन महीने के प्रशिक्षण के लिए मुजफ्फरनगर भेजा जा रहा है। हमले के 15 वर्ष बाद पांच अप्रैल को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के तौर पर वह मुजफ्फरनगर पहुंचेंगे।

अलीगढ़ के रहने वाले रिंकू सिंह ने यूपीपीएससी-2004 की परीक्षा पास कर 2008 में मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी बने। इसी दौरान छात्रवृति और शुल्क प्रतिपूर्ति के नाम पर विभाग में किए जा रहे घोटाले का पता चला।

माफिया के निशाने पर थे रिंकू सिंह

जांच के दौरान उन्होंने करीब 100 करोड़ के गबन के सुबूत जमा किए। कई बैंकों में जिला समाज कल्याण अधिकारी के पदनाम से खोले गए फर्जी खाते पकड़े। इनमें शासन से आने वाले करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के चेक जमा कर भुनाए जा रहे थे। इसकी शिकायत उन्होंने तत्कालीन सीडीओ सियाराम चौधरी से की। घोटाले की तह में जाने के चलते वह माफिया के निशाने पर आ गए।

2009 में हुआ था हमला

26 मार्च 2009 को एक सहकर्मी के साथ रिंकू सिंह सुबह सात बजे बैडमिंटन खेल रहे थे। तभी हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चला दी थीं। रिंकू सिंह को सात गोलियां लगीं और उनका जबड़ा भी बाहर आ गया था। उन्हें मेरठ ले जाया गया। करीब एक महीने तक वह अस्पताल में भर्ती रहे। कई आपरेशन के बाद वह ठीक होकर लौटे।

हमले के बाद उनकी एक आंख की रोशनी जाती रही और उन्हें मुंह की भी सर्जरी करानी पड़ी थी। रिंकू सिंह ने विपरीत हालात के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। अनुसूचित वर्ग से आने वाले रिंकू ने दो वर्ष पूर्व यूपीएससी परीक्षा में 921वीं रैंक हासिल की थी।

 

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