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यूपी की इस लोकसभा सीट पर हो सकता है बड़ा फेरबदल

Mayawati
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अकबरपुर संसदीय क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी यानी बसपा परिसीमन से पहले और परिसीमन के बाद से बेहतर करती आ रही है। परिसीमन से पहले बिल्हौर सीट पर वर्ष 2004 और वर्ष 2007 में बसपा ने जीत दर्ज की थी। परिसीमन के बाद बनी अकबरपुर सीट पर वर्ष 2009 से बसपा लगातार दूसरे नंबर पर बनी हुई है।

पिछड़ा और दलित बाहुल्य सीट पर बसपा इस बार नंबर दो को नंबर एक में बदलने की कवायद में जुटी हुई है। इसलिए उसके हिसाब से ठोस रणनीति बनाकर उस हिसाब से ही कदम बढ़ा रही है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोची-समझी रणनीति के तहत लोकसभा चुनाव में फैसले ले रही हैं। पहले उन्होंने संगठन में सर्व समाज की भागीदारी सुनिश्चित की। उसके बाद आइएनडीआइ गठबंधन से अलग अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था, ताकि आधार वोटरों को एकजुट किया जा सके। फिर गांव चलो अभियान में गांव-गांव जाकर बूथ मजबूत किए।

अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र पिछड़ा और दलित बाहुल्य है, जहां ब्राह्मण वोटर निर्णायक होते हैं। ऐसे में ठाकुर वोटरों को कमतर नहीं आंका जा सकता है। ऐसे में प्रत्याशी चयन में भी सावधानी बरती, इसलिए अकबरपुर सीट से ब्राह्मण उम्मीदवार और उससे लगी कानपुर सीट से ठाकुर प्रत्याशी पर दांव लगाया है। ताकि आधार वोटरों के साथ-साथ ब्राह्मण और ठाकुर वोटरों को भी अपने पक्ष में किया जा सके।

घर-घर जा रहे कार्यकर्ता

बसपा ने प्रत्याशी घोषित करने के साथ ही घर-घर कार्यकर्ताओं को भेजना शुरू कर दिया है। जनसंपर्क कार्यक्रम शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण अंचल में तेजी से चल रहा है। इसकी जिम्मेदारी विधानसभा, सेक्टर और बूथ कमेटियों को दी गई है।

आज बनेगी चुनाव संचालन समिति

बसपा जिलाध्यक्ष राज कुमार कप्तान का कहना है कि चुनाव संचालन समिति सोमवार को बनाई जाएगी। इससे पहले अकबरपुर संसदीय क्षेत्र के प्रत्याशी का नाम तय किया जा चुका है। सोमवार को कार्यक्रम आयोजित कर विधिवत घोषणा की जानी है। इसमें मुख्य जोनल कोआर्डिनेटर और लोकसभा क्षेत्र के समस्त पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।

बसपा का अपना समीकरण

जिलाध्यक्ष के मुताबिक दलित वोटर 4.50 लाख, जबकि पिछड़ा वोटर चार लाख है। इसके अलावा 3.25 लाख ब्राह्मण और 1.75 लाख वोटर ठाकुर हैं।

 

वर्ष 2004 बिल्हौर लोकसभा

2,23,195 बसपा (राजाराम पाल)

 

1,98,793 सपा (लाल सिंह तोमर)

 

1,59,681 भाजपा (श्याम बिहारी मिश्रा)

 

वर्ष 2007

2,29,123 बसपा (अनिल शुक्ला वारसी)

 

2,03,111 सपा (लाल सिंह तोमर)

 

1,14,620 भाजपा (श्याम बिहारी मिश्रा)

 

वर्ष 2009

1,92,549 कांग्रेस (राजाराम पाल)

 

1,60,506 बसपा (अनिल शुक्ला वारसी)

 

136907 भाजपा (अरुण कुमार तिवारी बाबा)

 

वर्ष 2014

4,81,584 भाजपा (देवेंद्र सिंह भोले)

 

2,02,587 बसपा (अनिल शुक्ला वारसी)

 

1,47,002 सपा (लाल सिंह तोमर)

 

वर्ष 2019

5,81,282 भाजपा (देवेंद्र सिंह भोले)

 

3,06,140 बसपा (निशा सचान)

 

1,08,341 कांग्रेस (राजाराम पाल)

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